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Saturday, February 18

फ़राग़त के वो पल ...


अनंत सागर की वो लहरें 
और उनको निहारती तुम 
गहरे आकाश के अनगिनत तारे  
और उनको निहारती तुम 

पैरों की उँगलियों से गुज़रती लहरें
और उनको निहारती तुम 
बंद मुठ्ठी से झरती सफ़ेद रेत 
और उसको निहारती तुम  

सुर्ख अर्श के सिफर को तकता मैं 
और मुझको निहारती तुम 
क़दमों पर कदम रखता चलता मैं 
और मुझको निहारती तुम...


माज़ी को फ़लसफ़ाता मैं 
और मुझको निहारती तुम 
मुस्तकबिल का वास्ता देता मैं
और मुझको निहारती तुम... 
 
ऐसे ही दिलकश थे 
फ़राग़त के वो पल ... 

... फ़राग़त के वो चंद पल!!

Wednesday, December 8

तीस साल...


गर इन नज़रों की ज़ुबां होती  

तो लफ़्ज़ों में क्या कुछ बयां करतीं...

  

ये कहतीं ... 

रूबरू होते हैं रोज़ तुमसे 

फिर भी सब ख़्वाब सा लगता है 

हर नए लम्हें की पहली मुलाकात  

बरसों पुराना साथ सा लगता है  


धड़कन थम सी जाती है  

रूह गुलज़ार लगने लगती है  

वही सालों पहले सी मोहब्बत 

रुख़सार सुर्ख़ कर जाती है  


तीस साल की दूरियां इबादत में गुज़री    

हर धड़कन पर मोहब्बत का साया सा है   

बहुत दूर निकल आयें हैं हम मगर   

दिल उस फ़ाटक पर ठहर सा गया है

...दिल वहीं, उस फ़ाटक पर ठहर गया है!!




Saturday, September 21

एक खाली शीशी


हर इरादा हर ख़्वाइश
हर ख़्याल हर उम्मीद
एक खाली शीशी में क़ैद
फ़लक की ओर तकते रहते हैं

हर आंसू हर मुस्कराहट
हर आह हर लफ्ज़
एक खाली शीशी में क़ैद
साहिल की ओर तकते रहते हैं 

ख़याल फिर भी दुनिया घूम आते हैं
ख्वाइशें भी पर फड़फड़ा लेती हैं
लेकिन वक़्त की झिल्ली में क़ैद
हम यूँ ही उफ़क़ को तकते रहते हैं
हम यूँ ही उफ़क़ को तकते रहते हैं





Sunday, August 28

न जाने कब


लफ़्ज़ों के मायने न जाने कब

ख़ामोशी की नज़र हो गए 
मुस्कुराते हमसफ़र न जाने कब
तमाशायी बन गुज़र गए 

आतिशीं नज़दीकियां न जाने कब 

फ़िराक़-ए-जान की नज़र हो गयी
इबादत-ए-इश्क़ न जाने कब 
लतीफ़ा-ए-नफ़्स बन गुज़र गयी 

ख़ुशबुओं का मंज़र न जाने कब

वीरानियों की नज़र हो गया   
बहारों का इंतज़ार न जाने कब
वहशत की सर्द धुंध से गुज़र गया

यादों की तस्वीरें न जाने कब

ख़ुश्क अश्कों की नज़र हो गयी  
इंतज़ार-ए-यार में न जाने कब
ज़िन्दगी तन्हां ही गुज़र गयी 






फ़िराक़-ए-जान = Distances in Life
लतीफ़ा-ए-नफ़्स = Joke of Life 
मंज़र = Scene / Landscape
वीरानियों = Desolation 
वहशत = Solitude 
ख़ुश्क अश्कों = Dry Tears 






Wednesday, May 4

फ़िज़ा...


सर्द हवाओं में एक तपिश सी है
गरजती मेह में एक गर्दिश सी है
आशना-ए-अक्स निगाहों में लिए
उन बिन हस्ती बेआब आईने सी है

सोज़ रातों को तन्हां करती
फ़िज़ा में आज एक नमी सी है

नफ़्स-ऐ-उल्फत कुछ थमी सी हैं
हसरत भरी निगाहें कुछ झुकी सी हैं
चल रहे हैं सोज़ ज़हन में सवाल लिए
उन बिन जवाबों में एक कमी सी है

सोज़ रातों को और तन्हां करती
फ़िज़ा में आज कुछ नमी सी है

नसीम-ए-बैहर में एक कशिश सी है
ज़िक्र-ऐ-उल्फत में एक खलिश सी है
रफ्ता रफ्ता बढ़ते क़दमों तले
उन बिन ज़िन्दगी में एक कसक सी है

सोज़ रातों को कुछ और तन्हां करती
फ़िज़ा में आज फिर कुछ और नमी सी है






Friday, November 6

दूरियां


कुछ दूरियां कुछ फासले अब भी बाकी हैं
कुछ ख्वाईशें कुछ उम्मीदें अब भी बाकी हैं
गुज़र नहीं पाते हम उन गलियों उन राहों से 
जिन पर उनके निशान अब भी बाकी हैं 

कुछ दूरियां कुछ फासले अब भी बाकी हैं
पलों में सिमटती सुर्ख शाम अब भी बाकी हैं 
हर लम्हा गुज़रता है उनके इंतज़ार में
फिजाओं में उनकी आहट अब भी बाकी है 

कुछ दूरियां कुछ फासले अब भी बाकी हैं
यादों की खूबसूरत कायनात अब भी बाकी है
मुन्तजिर हैं हर पल उनके दीदार के  
आतिशीं शामों की लौ अब भी बाकी है 


कुछ दूरियां कुछ फासले अब भी बाकी हैं
रूह से रूह का राबता अब भी बाकी हैं 
दूरियों के फनाह होने का है इंतज़ार
ज़िन्दगी से कुछ तवक्कोआत अब भी बाकी हैं

Friday, February 20

पल


पल पल कर दिन बीते, पल पल कर रातें 

यादों के कुछ खुशनुमा, कुछ फ़सुर्दा पल 
कुछ उनके आगोश की गहराईयों में बीते
दास्ताँ-ए-हसरत सुनाते बीते अब सारे पल 

पल पल कर दिन बीते, पल पल कर रातें 

ख्यालों के कुछ सौंधे, कुछ नम पल 
कुछ तेरे संग सूफियाना लम्हें संजोते बीते  
याद-ए-ऐय्याम में बीते अब सारे पल 

पल पल कर दिन बीते, पल पल कर रातें 

तस्सव्वुर के कुछ सोज़, कुछ सर्द पल 
कुछ तेरे संग रूमानी गुफ़्तगू करते बीते
हार-ए-अल्फ़ाज़ पिरोते बीते अब सारे पल  

पल पल कर दिन बीते, पल पल कर रातें 

कुछ तेरी, कुछ मेरी ज़िन्दगी से चुराए पल  
कुछ तेरी निगाहों के दामन में बीते  
अक्स-ए-उल्फत सजाये बीते अब सारे पल 


पल पल कर दिन बीते, पल पल कर रातें 
कुछ तेरे, कुछ मेरे तन्हां पल 
कुछ तेरी दुआओं के साये में बीते 
इज़हार-ए-तमन्ना में बीते अब सारे पल 

Saturday, December 20

वो


गुज़रे वो दर से हमारे कुछ इस तरह...
के सुर्रूर भी न छाया और नशा भी हो गया...

लबों को छू उनके लब गुज़र गए कुछ इस तरह...
के रुक्सार सुर्ख भी हुए और दिल सोज़ भी न हुआ...

पलकों की चिलमन से हुआ दीदार कुछ इस तरह...
के निगाहें भी न मिली और दिल रोशन भी हो गया...

गुल-ए-फ़िरदौस में टहलते रहे कुछ इस तरह ...
के सौ रंग भी छलके और दामन सुर्ख़ भी न हुआ...

गुज़रे वो दर से हमारे कुछ इस तरह...
के संग भी रहा और जुदा भी हो गया...





Saturday, May 3

सुरूर



राह-ए-दहर पर पैगाम-ए-उल्फत
महराब-ए-जाँ तक आहटों में आते रहे
लफ़्ज़ों में वो जो न फरमा सके
सुरूर-ए-तबस्सुम से महकाते रहे

ज़िन्दगी के दायरों का अफसाना
सुनते सुनाते संग चलते रहे
किस्मत का लिखा न मिटा सके  
सुरूर-ए-इश्क रोज़ छलकाते रहे

गुज़ारिश की थी खुदा से कभी
ताउम्र संग हम कदम मिलाते रहे
मिला है आज वो मुज्तनिब साहिल
सुरूर-ए-तपिश में जिसकी पिघलते रहे 

समय से पहले, क़िस्मत से ज्यादा
हमें कुछ मिले, कभी ये नसीब ही न रहे 
बरस गुज़रे सोज़ साए महसूस करते
सुरूर-ए-अपिश में जिसकी तपते रहे


राह-ए-दहर = Path of Life
पैगाम-ए-उल्फ़त = Messages of Love
सुरूर-ए-तबस्सुम = Intoxicating Smiles
सुरूर-ए-इश्क = Love's Joy
मुज्तनिब साहिल = Evasive Shores
सुरूर-ए-तपिश = Pleasure of Warmth
सोज़ साए = Passionate Apparition
सुरूर-ए-अपिश = Rapture of Passion








Monday, November 25

कैसे??



रूठ कर हमसे सासें ले पाओगे कैसे?
खफा हो हमसे मुस्कुरा पाओगे कैसे?
साज़-ए-दिल के तार जुड़े हैं जन्मों से 
मोहब्बत की ये नज़्म अनसुनी कर पाओगे कैसे?

लफ़्ज़ों से ख़्वाबों को हासिल कर पाओगे कैसे? 
तड़प कर आरज़ूओं की ताबीर कर पाओगे कैसे?
अहल-ए-दिल है इस क़दर एक दूजे में
बज़्म-ए-उल्फत में खुद को तन्हा पाओगे कैसे?

तन्हाई का दामन थामे क़ज़ा तक चल पाओगे कैसे?
बेपनाह मोहब्बत कर हमसे गैरों के हो पाओगे कैसे?
हमकदम रहे हैं यूँ हम तुम बरसों से  
ज़र्रा ज़र्रा अरमानों को ले राह-ए-दहर पर चल पाओगे कैसे?  

चाँद तारों को पाने की ख्वाइश पूरी कर पाओगे कैसे?
फलक पर जहाँ बसाने की आरज़ू को अंजाम दे पाओगे कैसे? 
उस नैरंग-ए-सहर का इंतज़ार रहेगा हमें  
खुशीयों का सुर्ख दामन इस जन्म में ओढ़ा पाओगे कैसे? 





साज़-ए-दिल = Instrument of the Heart
नज़्म = Song
ताबीर = Completion, Realization
अहल-ए-दिल = Resident of Heart
बज़्म-ए-उल्फत = Gathering of Love
क़ज़ा = Death
ज़र्रा ज़र्रा = Small Particles
राह-ए-दहर = Path of Life 
फलक - Sky 
नैरंग-ए-सहर = Magical Morning
सुर्ख दामन = Red Dress 

Friday, November 15

अक्स-ए-ज़िन्दगी - २



अरमानों की डोर टूटा नहीं करती 
इरादों की पतंग झुका नहीं करती
मोहब्बत संग हो गर ए-दोस्त मेरे 
फलक की कोई सीमा नहीं होती 

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आब-ऐ-चश्म तो हम रोज़ पिया करते हैं 
पैमानों को भी रोज़ छलकाया करते हैं
ये कमबख्त तिश्नगी ही नहीं बुझती, ए-साकी 
तेरे लबों से आब-ऐ-उल्फत जो पिया नहीं करते हैं 

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उनके गालों की ये सुर्खियाँ देख
यारों ने हाल-ऐ-दिल पूछ ही लिया
इससे पहले कह पाते लफ़्ज़ों में कुछ 
भीनी मुस्कराहट ने हाल बयान कर दिया 

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इज़हार-ए-इश्क इशारों में कर चुके हैं वो
चंद लम्हों में जन्नत सजा चुके हैं वो 
इल्तज़ा है उनसे इस बेसर्ब दिल की 
आरज़ूओं को लफ़्ज़ों में अब तो बयान कर दें वो

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नज़रें जो उनसे मिली तो इबादत हो गयी
हमआगोश जो हुए तो क़यामत हो गयी
चल रहे थे सुनसान राहों पर अकेले
संग चल लिए वो तो राह चमनज़ार हो गयी 

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फलक = Sky 
आब-ऐ-चश्म = Tears
तिश्नगी = Longing Thirst
आब-ऐ-उल्फत = Water of Love
हमआगोश = Embraced
चमनज़ार = Garden of Flowers


अक्स-ए-ज़िन्दगी - १



ज़माने के दस्तूर निभाते, रह गयी जो तमन्नाएँ अधूरी 
दुआ करेंगे रब से, के वक्त रहते हो जाएं वो पूरी
रहें करीब या हों मीलों की दूरी  
साथ रहे बस, न हो दिलों में कोई दूरी 

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उनकी निगाहों के सायों से जो हम गुज़रे 
उनकी हसरतों के कई अधूरे हर्फ़ जो पढ़े
जिस अनकही इश्तेहा-ए-इश्क़ से वो आश्ना हुए 
लगा के जैसे अक्स-ए-ज़िन्दगी से रुबरु हुए

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ख्वाबिदा हुए उनके सीने पर सर रख 
हौले हौले धड़कते दिल की ग़ज़ल सुनते 
सासें जो पल भर के लिए उन्होंने थामी  
ऐसा लगा नफ़्स-ओ-जाँ रिहा हुई हमारी  

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महकती इस फ़िज़ा में खुश्बू आपकी ही आती है 
रोशनदान से छलकती धूप आपकी मुस्कान याद दिलाती है 
कैसे करें हम पलकें मूंदने की हिमाक़त 
के खुली हों या बंद आपकी ही तस्वीर झलकाती हैं    

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हर्फ़ = Page
इश्तेहा-ए-इश्क़ = Lust of Love
ख्वाबिदा = Dreamy Sleep
नफ़्स-ओ-जाँ = Spirit and Life

Saturday, September 21

यूँ ही


यूँ बिसरी यादों से न पुकारो हमें 
के भुलाना मुश्किल हो जाए
यूँ ख़्वाबों में न पुकारो हमें 
के जागना मुश्किल हो जाए

यूँ आगोश में ले न जकड़ो हमें 
के जुदा होना मुश्किल हो जाए 
यूँ दिल-ओ-जाँ न अर्पण करो हमें
के तन्हा जीना मुश्किल हो जाए 

यूँ झुकी पलकों से न निहारो हमें 
के ओझल होना मुश्किल हो जाए 
यूँ बेबाक बेपनाही से न चाहो हमें 
के अक्स पहचानना मुश्किल हो जाए 

यूँ ढुलकते अश्कों में न ढूंढो हमें 
के आँखें मूंदना मुश्किल हो जाए
ज़माने के दायरों दफ़न गर पाओ हमें
कहीं हर नफ्स तन्हाँ न हो जाए  



बिसरी यादों = Old Memories                              दिल-ओ-जाँ = Heart 'n Soul
अर्पण = Dedicate                                            तन्हा = Alone
निहारो =  Behold                                             ओझल = Disappear
बेबाक = Frank                                                बेपनाही = Boundless
अक्स = Reflection                                          ढुलकते = Rolling
अश्कों = Tears                                   दायरों = Boundaries                                        दफ़न = Buried
नफ्स = Breath                                  तन्हाँ = Lonely

Sunday, August 11

इल्म



हर मुलाकात बेसब्र सी गुज़रती है 
लबों पर हर बात आ आ कर थमती है 
रोज़ सोचते हैं करेंगे गुज़ारिश उनसे
क्या, कैसे कहें कुछ उनसे ...
के उन्हें देख निगाह भी ख़ामोशी ओढ़ लेती है  

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यादों के नशे में गर हम चूर हुए होते
उनकी इबादत से ही गर दूर हुए होते 
न देख पाते उनकी निगाहों में अक्स अपना
गर उनके ख़्वाबों के दायरे से दूर हुए होते 

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ख़्वाबों की ताबीर गर हमने की होती उस रोज़ 
यादों, ख्वाइशों में न यूँ गुज़री होती तन्हाँ रातें
कर देते गर हाल-ए-दिल बयान उनसे उस रोज़ 
हसरतों का दामन थामें न यूँ गुज़री होती तन्हाँ रातें

पलट कर हमने जो देखा आज उन सूनी राहों को 
उनसे जुदा होते हुए भी न यूँ गुज़री थी तन्हाँ रातें 
पलकों की चिलमन में सदा था अक्स उनका
उनके ख्यालों में ही यूँ गुज़री थी वो ख्वाबिदा रातें  

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पलकों पर लिए उनके अक्स के निशाँ 
रूबरू हुए हम उनसे उन्हीं के दर पर  
बेताब निगाहें जो मिली दायरों में सिमट 
बयान-ए- इश्क हुआ उन्हीं के दर पर 

हसरतों का ज़िक्र हुआ निगाहों-निगाहों में   
आगोशकुषा हुए उनसे उन्हीं के दर पर 
यकायक इल्म हुआ दूरियां न थीं कभी दरमियान 
के साया बन संग थे वो हमेशा हर तह दर पर 


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ख्वाबिदा = Full of Dreams
आगोशकुषा = Embrace
यकायक = Suddenly
तह दर = Closed Door




Sunday, June 30

आहट


हसीं फिजाओं में उनके आने की आहट सी है
झिझकती पलकें हैं झुकी, रुखसार पर सुर्खी सी है
क्या कहें, क्या नहीं, के लफ्ज़ थम से गए हैं
दर-ए-यार पर इश्तिआक निगाहें टिकी हैं
इश्क की बौछारों का इंतज़ार है इस शुष्क दामन पर
के फिजाओं में होती हर आहट से हर नफ़्स जुड़ी हुई है

पत्तों की सरसराहट में क़दमों की आहट सी है
नज़रों में है शरारत, सुर्ख लबों पर नमी सी है 
कैसे करें दास्ताँ-ए-हसरत बयान, के लफ्ज़ थम से गए हैं
इश्तिआक़ बाहें इंतज़ार-ए-आगोश में फैली हुई हैं 
इश्क की बौछारों का इंतज़ार है इस शुष्क दामन पर
के पत्तों पर होती हर आहट से हर नफ़्स जुड़ी हुई है

गुलों की खुशबू में उनकी महक की आहट सी है 
ज़हन में है अक्स, साँसों में उनकी हस्ती सी है 
कैसे संभलें के अलफ़ाज़-ए-उल्फत दायरे लांघ रहे हैं 
थिरकते क़दमों में उनकी खनक बसाये जा रहे हैं 
इश्क की बौछारों का इंतज़ार है इस शुष्क दामन पर
के गुलों पर होती हर आहट से हर नफ़्स जुड़ी हुई है 



हसीं फिजा = Beautiful Surroundings                 रुखसार = Cheeks
दर-ए-यार = Lover's door                                लफ्ज़ = Words
इश्तिआक  निगाहें = Craving Eyes                      सुर्ख = Red   
दास्ताँ-ए-हसरत = Story of Desire                     शुष्क = Dry 
इश्तिआक़ बाहें = Craving Arms                          नफ़्स = Breath
अलफ़ाज़-ए-उल्फत = Words of Love                  आगोश = Hug 
महराब-ए-जान = Core of the Heart                   दायरे = Boundaries
खनक = Sweet Rhythmic Sound                       अक्स = Reflection 



Wednesday, June 19

इबादत


तनहाइयों का दामन थामें 
पल पल याद उन्हें किया करते हैं
सरसराती नम हवा के झोंके 
करीब होने का एहसास दिया करते हैं  

महक उनकी लिए आगोश में 
हौले हौले सांसें लिया करते हैं
निगाहों में लिए अक्स उनका  
हिजाब-ए-हया से झाँक लिया करते हैं 

उनसे जुदाई का है इल्म हमें 
फिर भी मोहब्बत किया करते हैं
पलकों पर थमें अश्क़-ए-जुदाई 
न जाने की इल्तेज़ा किया करते हैं 

कज़ा में नहीं है साथ उनका 
पर यादों में इबादत किया करते हैं
ता उम्र रहेंगे वो ही हमसफ़र हमारे 
ख़्वाबों में वो अक्सर हाथ थाम लिया करते हैं  




अक्स - Reflection
हिजाब-ए-हया - Veil of shyness
अश्क़-ए-जुदाई - Tears of Parting
क़ज़ा - Destiny
इबादत - Prayer





Thursday, May 23

रूबरू



रूबरू हुए जो हम उनसे ...

लफ़्ज़ों से दिल सोज़ अफ़साने लिखते गए 
आप-बीती में पैगाम-ए-उल्फत पढ़ते गए 
ख़्वाबों से नए कलाम अर्ज़ करते गए 
इरादों से नए अरमान सजाते गए 

रूबरू हुए जो हम उनसे ...

लबों पर खामोशियों के तराने छिड़ गए
महक उनकी ज़हन में हम समाते गए 
पलकों पर लम्हों के अक्स बनते गए
रुखसार सुर्ख-ए-गुलिस्तान होते गए 

रूबरू हुए जो हम उनसे ...

बज़्म-ए-मोहब्बत हम सजाते गए
नगमा-ए-इश्क़ गुनगुनाते गए 
कदम ख़ुद-ब-ख़ुद थिरकते चले गए
हम उन में, वो हम में, समाते चले गए 



रूबरू हुए जो हम उनसे ...
... हम उन में, वो हम में, समाते चले गए !!

वजूद



राह-ए-दहर पर चल रहे हैं 
ख्यालों का एक हुजूम लिए 
कौन हूँ मैं, क्या हूँ, क्यों हूँ 
सवालों की एक तूफ़ान लिए

दोराहों पर आ कदम थम जाते हैं
सही-गलत की जद्दोजहद लिए
सच है क्या, क्या नहीं, बेख़बर हैं
चल रहे हैं माया का एक भ्रम लिए

हकीकत-ख़्वाबों की कशमकश है
उमड़ता सैलाब-ए-जज़्बा लिए
राह है कौनसी, मंजिल है कहाँ
वजूद क्या है, ये सोज़ सवाल लिए

निगाहें तलाशती हैं आज भी वो दामन
आगोश-ख़ुशा है जो नफ़स-ए-सुकून लिए
काश के थमे होते कदम उस पड़ाव पर
ठहरा है जो उसी मोड़ पर दास्ताँ-ए-हसरत लिए 


हुजूम = Crowd
जद्दोजहद = Dilemma
सैलाब-ए-जज़्बा = Storm of Emotions
सोज़ = Burning
आगोश-ख़ुशा = Waiting to Embrace
नफ़स-ए-सुकून = Peaceful Breath
दास्ताँ-ए-हसरत = Story of Desires







Tuesday, April 30

साये


कल रात हुए रूबरू इन पलकों से  
कुछ अपने, तो कुछ उनके साये  

कुछ झुलसाती धूप के ठन्डे
तो कुछ सर्द किरणों के आतिशीं साये
कुछ संग चलते तन्हा 
तो कुछ हमसफर बने बेगाने साये

कुछ छोटी लंबी बातों के
तो कुछ जज़्बातों के साये
कुछ उनकी यादों के
तो कुछ हमारे ख़्वाबों के साये

कुछ मिलते हुए 
तो कुछ जुदा होते साये 
कुछ जुड़ते हुए
तो कुछ बिखरते साये

कुछ हमदमी के
तो कुछ अघ्यार साये
कुछ मोहब्बतों के 
तो कुछ नफरतों के साये

कुछ लरजते
तो कुछ थिरकते साये 
कुछ महकते
तो कुछ घलीज़ साये 

कुछ मुस्कुराहटों के
तो कुछ अश्कों के साये
कुछ खुशीयों के रंगीन
तो कुछ ग़मों के स्याह साये

कुछ लकीरों के
तो कुछ कर्मों के साये
कुछ तजुर्बों के संजीदा
तो कुछ पोशीदा से साये

कुछ क़त्ल करते
तो कुछ कुर्बान होते साये
कुछ हमसे जन्मे
तो कुछ हमें जनते साये

कल रात हुए रूबरू इन पलकों से
कुछ अपने, तो कुछ उनके साये 


आतिशीं = Fiery
जज़्बातों = Emotions
हमदमी = Friendship
अघ्यार = Stranger, Enemy
घलीज़ = Filthy
तजुर्बों = Experience
संजीदा = Serious
पोशीदा = Secretive


Wednesday, April 24

ऐतबार


खुशियों की इबादत जो कर न सके 
उन तिफ़्ल-ए-अश्क का ऐतबार कैसे करें 
रंजीदा पलकों पर जो थम न सके 
उन सेल-ए-नज़र का ऐतबार कैसे करें 

इज़हार-ए-एहसास जो कर न सकी 
उस नज़-ए-उल्फत का ऐतबार कैसे करें
कसक-ए-तन्हा-रूह जो बयाँ कर न सकी 
उस नफ़्स-ए-आख़िर का ऐतबार कैसे करें

धड़क धड़क भी जो इबादत कर न सका 
उस दिल-ए-कस्ता का ऐतबार कैसे करें
लख़्त लख़्त हो कर भी जो उन्हें रंग न सका 
उस कल्ब-ए-मुज़्तर का ऐतबार कैसे करें

ज़हन में बस कर भी जो हमारे न हो सके  
उन हवास-ए-रफ़्ता का ऐतबार कैसे करें 
नावेद-ए-अज़ल सुन जो साथ निभा न सके 
उन हवास-ए-रफ़्ता का ऐतबार कैसे करें 



रंजीदा = Sad
तिफ़्ल-ए-अश्क = Child-like Tears 
सेल-ए-नज़र = Flood from one's Eyes (Tears)
नज़-ए-उल्फत = Last Breath of Love
नफ़्स-ए-आख़िर = Last Breath of Life
दिल-ए-कस्ता = Impatient Heart
कल्ब-ए-मुज़्तर = Restless Heart
नावेद-ए-अज़ल = Death's Call
हवास-ए-रफ़्ता = Lost Senses